पूर्व मंत्री विमला प्रधान का निधन: सिमडेगा में शोक की लहर, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली पहुंचाने और उनके राजनीतिक सफर पर एक नजर

सिमडेगा: झारखंड की राजनीति में प्रमुख चेहरा और राज्य की पूर्व पर्यटन मंत्री रहीं विमला प्रधान के गुजर जाने से पूरे सिमडेगा जिले में शोक व्याप्त है। दो बार विधानसभा क्षेत्र का नेतृत्व कर चुकीं विमला प्रधान राजनीति के साथ-साथ कई सामाजिक और धार्मिक कार्यों में अग्रणी रही थीं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने क्षेत्र के बुनियादी विकास के लिए कई काम किए, जिनमें विशेष रूप से कुरडेग, केरसई और बोलबा के दूर-दराज गांवों तक बिजली पहुंचाना शामिल था, जिसे स्थानीय लोग आज भी सम्मान के साथ याद करते हैं।

केरसई, कुरडेग और बोलबा में विद्युतीकरण के लिए किया प्रयास
रघुवर दास के मुख्यमंत्री रहते हुए विमला प्रधान ने क्षेत्र के कई वंचित इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल कराने के लिए कड़ा संघर्ष किया था। केरसई, बोलबा तथा कुरडेग जैसे ग्रामीण अंचलों में लंबे समय से चल रही बिजली की किल्लत को दूर करने के लिए उन्होंने संबंधित सरकारी विभागों और शासन स्तर पर निरंतर आवाज उठाई। जब इन क्षेत्रों के गांवों तक रोशनी पहुंची, तो ग्रामीणों के दिल में उनके प्रति आदर और अधिक बढ़ गया।
2009 और 2014 में लगातार दो बार जीतीं चुनाव
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर विमला प्रधान ने पहली बार वर्ष 2009 में सिमडेगा सीट से जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2014 के चुनावों में भी जनता ने उन पर दोबारा भरोसा जताया। वर्ष 2009 से लेकर 2019 तक लगातार 10 वर्षों तक सिमडेगा की विधायक रहने के दौरान उन्होंने राज्य मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी संभालीं।
2019 के चुनाव में नहीं मिला टिकट
वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव के समय भाजपा ने सिमडेगा सीट से उम्मीदवार बदल दिया, जिसमें पार्टी प्रत्याशी को मात्र 287 मतों के मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा। उनके समर्थकों का मानना है कि यदि 2019 में भी विमला प्रधान पर ही भरोसा जताया जाता, तो वे लगातार तीसरी बार विधानसभा में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करतीं। हालांकि यह समर्थकों का अपना राजनीतिक दृष्टिकोण है।

बेटे को विधायक देखने की इच्छा रह गई अधूरी
विमला प्रधान के साथ-साथ उनका परिवार भी लगातार संगठन और राजनीति में सक्रिय रहा। उनके पुत्र राकेश रविकांत भी भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत हैं। स्थानीय समर्थकों के अनुसार, विमला प्रधान का एक सपना था कि वे अपने पुत्र को सिमडेगा से विधायक के रूप में देखें, परंतु इस इच्छा के पूरा होने से पहले ही वे दुनिया से विदा हो गईं।
सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में भी रहीं सक्रिय
राजनीतिक जीवन से परे, विमला प्रधान विभिन्न सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थीं। उनके जाने के बाद क्षेत्र की जनता उनके जनसेवा के कार्यों, सादगी और विकास से जुड़ी पहलों को याद कर रही है। दो बार विधायक रहने के दौरान क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के उनके योगदान की हर तरफ चर्चा हो रही है।

