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November 3, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

केंद्रीय मंत्री सह सांसद अर्जुन मुंडा ने वन पालन समिति के साथ संवाद किया

भारत सरकार के जनजातीय केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि जल जंगल एवं जमीन हमारा पहचान है. बदलते परिवेश में आदिवासी समाज की भूमिका अहम हो गई है. परंपरा प्राकृतिक सभ्यता एवं भाषा को संरक्षित कर आदिवासी समाज को आगे बढ़ना होगा. जनजातीय समाज को शिक्षित बनाने में भारत सरकार हर प्रयास कर रही है. आदिवासी समाज की नई पीढ़ी को वर्तमान के नित्य से प्रेरित कर आगे बढ़ना होगा.

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एकजुटता के साथ आत्मा स्वावलंबन बनकर अच्छे नागरिक के रूप में आगे बढ़े. उक्त बाते महा जनसर्पक अभियान के तहत कुचाई किसान भवन में शुक्रवार को वन पालन समिति के संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बोल रहे थे. कार्यक्रम में पेशा कानून और फॉरेस्ट राइट एक्ट के अधिकारो से रू-ब-रू कराते हुए कहा कि जल जंगल एवं जमीन पर वनाश्रितो का अधिकार है. धरती पुत्र होने के नाते, आदिवासियों को वन अधिकार, पट्टा अधिकार और यहां तक कि सामुदायिक अधिकार भी होने चाहिए. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें ये अधिकार मिलें. श्री मुंडा ने कहा कि केंद्र सरकार ने समस्त गांवों को वन क्षेत्र के प्रबंधन और संरक्षण की जिम्मेवारी दी है. इसी में फॉरेस्ट राइट एक्ट भी है और इसे पुनः संरक्षित करने का काम भारत सरकार कर रही है. हाई कोर्ट ने भी कहा था कि जंगल के प्रबंधन का अधिकार वहां रहने वाले लोगों का है और भारत सरकार इसपर काम कर रही हैं. हमारी पहचान जल, जंगल और जमीन है. बिरसा मुंडा का बलिदान भी जल, जंगल, जमीन के लिए हुआ. इसके बाद कुचाई प्रखंड मुख्यालय पहुचकर केन्द्रीय मंत्री ने अचंल अधिकारी रवि कुमार और प्रखंड बिकास पदाधिकारी सुजाता कुजूर से वन कानून के तहत सामुदायिक वन पटटा और व्यक्तिगत वन पटटा वितरण करने संबधित जानकारी ली. इस दौरान मुख्य रूप से जनजातीय केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, मीरा मुंड़ा, पूर्व विधायक मंगल सिंह सोय, कुचाई प्रमुख गुडडी देवी, खरसावां प्रमुख मनेन्द्र जामुदा, खूंटपानी प्रमुख सिद्वार्थ होनहागा, मुखिया लुदरी हेम्ब्रम, भाजपा जिलाध्यक्ष विजय महतो, सुखराम मुंडा, सत्येन्द्र कुम्हार, उदय सिंहदेव, मंगल सिंह मुंडा, मनोज मुदुईया, धमेन्द्र साडिल, अश्वनी सिंहदेव, मनीषा सामाड, लाल सिंह सोय, प्रशांत कुमार महतो, अमित कैशरी, विश्वजीत प्रधान, मानकी मंड़ा आदि मौजूद थे.

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