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November 3, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

चुनावी स्याही : कौन कंपनी बनाती है? क्यों नहीं मिटती? पढ़ें विस्तार से…

चुनावी स्याही,अमिट स्याही,चुनावी दाग,या फॉस्फोरिक स्याही का प्रयोग दोहरे मतदान जैसे चुनावी धांधली को रोकने के लिए चुनाव के दौरान मतदाताओ के बाएं हाथ के तर्जुनी अंगुली पर चुनाव अधिकारी के द्वारा लगाया जाता है। यह स्याही जल्दी मिटती नहीं है। लोकतंत्र को मजबूत करने वाली यह स्याही चुनाव का अभिन्न अंग है।

यह स्याही मैसूर पेंट्स ऐंड वर्निश लिमिटेड बनाती है। यह स्याही बनाने बाली कंपनी की शुरूआत साल 1937 मे हुई थी। स्याही बनाने का विधि भी गोपनिय है। यह कंपनी किसी और के साथ स्याही बनाने की विधि शेयर नही करती है। कंपनी भारत मे ही नही बल्कि विश्व के 25 से 30 देशो मे इस स्याही का निर्यात करती है। स्याही के एक शीशी मे कम से कम 700 उंगलियो पर पक्की निशान लगाई जा सकती है। इसका पहली वार भारत मे प्रयोग 1962 के आम चुनाव मे हुआ था।

स्याही का विकास भारतीय औद्योगिक अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला के द्वारा किया गया था और मैसूर पेंट्स ऐंड वार्निश कंपनी के द्वारा निर्मित किया गया। स्याही का आणविक सूत्र C14H26N24S होता है। इस स्याही मे सिल्वर नाइट्रेट पाया जाता है। जिससे त्वचा पर दाग पड जाता है और धोना बहुत ही मुश्किल होता है।

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