रंजय सिंह हत्याकांड: फैसला टला, 337 तारीखों बाद नई तारीख का इंतजार

विगत लगभग पौने दस सालों से विचाराधीन बहुचर्चित रंजय सिंह हत्याकांड में शनिवार, 5 सितंबर को आने वाला फैसला स्थगित हो गया। अदालत में 337 तारीखों की सुनवाई संपन्न होने के पश्चात अब न्यायाधिकरण द्वारा अगली तिथि पर निर्णय सुनाया जाएगा।
तकरीबन नौ वर्ष और नौ महीने से चल रहे चर्चित रंजय सिंह हत्याकांड में शनिवार, 5 सितंबर को आने वाला अदालत का फैसला टल गया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश (सोलहवें) दुर्गेश चंद्र अवस्थी के न्यायालय ने अंतिम निर्णय सुनाने के लिए नई तारीख निर्धारित करने का निर्णय लिया है।
अदालत में 337 दफा सुनवाई होने के बाद शनिवार को फैसला आने की पूरी उम्मीद जताई जा रही थी, जिसको लेकर मृतक के स्वजनों और मामले से जुड़े लोगों की निगाहें अदालती प्रक्रिया पर टिकी थीं। हालांकि अब उन्हें न्याय पाने के लिए कुछ समय और प्रतीक्षा करनी होगी।
29 जनवरी 2017 की शाम हुई थी हत्या
रंजय सिंह उर्फ रवि रंजन सिंह की 29 जनवरी 2017 की शाम सरायढेला थाना क्षेत्र के बिग बाजार के समीप चाणक्य नगर मोड़ के पास अंधाधुंध गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अदालती दस्तावेजों और पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, रंजय सिंह स्कूटी से जा रहे थे और उनके साथ राजा यादव भी सवार थे।
चाणक्य नगर के समीप अज्ञात हमलावरों ने रंजय सिंह को निशाना बनाते हुए गोलियां चला दीं। इस हमले में रंजय सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद राजा यादव बाल-बाल बच गए। घटना के तुरंत बाद राजा यादव के बयान पर सरायढेला थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
मेयर संजीव सिंह के करीबी माने जाते थे रंजय
रंजय सिंह को तत्कालीन मेयर संजीव सिंह का बेहद करीबी सहयोगी माना जाता था। इसी कारण यह वारदात धनबाद के राजनीतिक और आपराधिक गलियारों में लंबे समय तक सुर्खियों में रही।
वारदात के बाद पुलिस अनुसंधान के दौरान नंद कुमार सिंह उर्फ रूना सिंह उर्फ बबलू उर्फ मामा और हर्ष सिंह के नाम प्रकाश में आए थे। तदनुसार पुलिस ने दोनों नामजद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। हालांकि, आरोपों की सत्यता पर अंतिम फैसला अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों और बहसों के आधार पर होना है।
अभियोजन ने पेश किये 23 गवाह
न्यायालय में मामले की कानूनी कार्रवाई काफी लंबे समय तक चली। अभियोजन पक्ष ने कुल 23 गवाहों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। इन गवाहों में वारदात के चश्मदीद राजा यादव के अलावा पुलिस अधिकारी, चिकित्सीय विशेषज्ञ और तकनीकी साक्ष्यों से जुड़े गवाह शामिल रहे।
अभियोजन पक्ष की दलील है कि यह हत्या एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत की गई थी और आरोपियों के विरुद्ध पुख्ता सबूत मौजूद हैं। दूसरी तरफ, आरोपी हर्ष सिंह ने अपने सफाई बयान में आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि घटना के समय वे धैया स्थित अपने आवास पर थे और उन्हें घटना की जानकारी बाद में मिली।
अब नयी तारीख पर टिकी निगाहें
दोनों पक्षों की अंतिम बहस समाप्त होने के बाद अदालत ने 5 सितंबर की तिथि फैसले के लिए मुकर्रर की थी। अदालत ने आरोपी नंद कुमार सिंह (मामा) और हर्ष सिंह को फैसले के दिन व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश भी दिया था।
शनिवार को फैसला टल जाने के बाद अब सभी की निगाहें कोर्ट द्वारा तय की जाने वाली अगली तारीख पर टिकी हैं। करीब नौ साल नौ महीने और 337 सुनवाई के पड़ाव पार करने के बाद अब अंतिम फैसले का इंतजार थोड़ा और बढ़ गया है।


