बांका के दो भाइयों मोहन-राकेश ने स्वरोजगार में बनायी ग्लोबल पहचान, 2000 लोगों को दे रहे रोजगार

Banka Brothers Success Story: जब इरादे मजबूत और हौसले बुलंद हों, तो तंगहाली और विपरीत परिस्थितियां भी कामयाबी का रास्ता नहीं रोक सकतीं. ऐसी ही एक बेमिसाल और प्रेरणादायक कहानी बिहार के बांका जिले के दो सगे भाइयों, मोहन यादव और राकेश यादव की है. इन दोनों भाइयों ने अपने कड़े संघर्ष और अद्वितीय हुनर के दम पर स्वरोजगार (Self-employment) के क्षेत्र में न केवल बिहार और झारखंड बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक खास पहचान बनाई है. आज इनका बिजनेस मॉडल कई राज्यों में फैल चुका है और वे हजारों युवाओं के भविष्य को संवार रहे हैं.
बांका जिले के चांदन प्रखंड के अंतर्गत आने वाले छोटे से गांव पिंड़रा के रहने वाले मोहन और राकेश ने शून्य से शुरुआत कर ग्लोबल स्तर तक का सफर तय किया है. आज इस जोड़ी ने बिहार और झारखंड के विभिन्न शहरों में अपने 32 से अधिक आधुनिक सेंटर्स स्थापित कर दिए हैं. इन सेंटर्स के माध्यम से सीधे तौर पर 2,000 से अधिक लोगों को सम्मानजनक रोजगार मिला हुआ है. इतना ही नहीं, कला और सौंदर्य के क्षेत्र में अपने हुनर का लोहा मनवाते हुए इस जोड़ी ने वर्ष 2025 में हेयर कलरिंग (Hair coloring) के क्षेत्र में एक अनोखा कीर्तिमान स्थापित किया, जिसके लिए उनका नाम आधिकारिक रूप से ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में भी दर्ज किया जा चुका है.
संघर्ष भरा बचपन, मेहनत से मिली पहचान
मोहन और राकेश का शुरुआती जीवन बेहद चुनौतीपूर्ण और कठिनाइयों से भरा रहा. बचपन के दिनों में ही उनके सिर से पिता पैरू उर्फ परमेश्वर यादव का साया उठ गया था. पिता के असमय निधन के कारण पूरे परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी बेहद कम उम्र में ही इन दोनों भाइयों के कंधों पर आ गिरी. भीषण आर्थिक तंगी के चलते मोहन को पेट पालने के लिए कोलकाता जाकर मजदूरी का काम करना पड़ा, वहीं दूसरी तरफ राकेश ने अपने ननिहाल में रहकर पशुपालन और खेती-बाड़ी से जुड़े अन्य कामों में हाथ बंटाया. पर्याप्त शिक्षा और संसाधनों के अभाव के बावजूद दोनों भाइयों ने कभी परिस्थितियों के आगे घुटने नहीं टेके और अपने जीवन को एक नई व सम्मानजनक दिशा देने का संकल्प लिया.
हुनर से बदली जिंदगी की दिशा
लगभग 5 सालों तक अलग-अलग शहरों में कड़ा परिश्रम करते हुए दोनों भाइयों ने प्रसाधन और ग्रूमिंग (Grooming & Styling) के हुनर को बारीकी से सीखा और उसमें महारत हासिल की. जब उन्हें अपने काम का अच्छा-खासा अनुभव हो गया, तब वर्ष 2013 में उन्होंने झारखंड के धनबाद शहर से अपने पहले स्वरोजगार की नींव रखी. धनबाद से शुरू हुआ यह छोटा सा प्रयास देखते ही देखते एक बड़े अभियान में बदल गया और इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.
बिहार-झारखंड में कई ब्रांच
आज के समय में इन दोनों भाइयों का यह बिजनेस नेटवर्क बिहार और झारखंड के लगभग सभी प्रमुख शहरों में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा चुका है. इनके प्रत्येक आउटलेट और ब्रांच में आधुनिकतम मशीनें, वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं और भारी निवेश किया गया है. इस बड़े नेटवर्क के जरिए जहां 2,000 से अधिक कुशल और अकुशल लोगों को रोजगार मिला हुआ है, वहीं यह संस्थान अब तक 1,000 से अधिक ग्रामीण व कस्बाई युवाओं को प्रोफेशनल ट्रेनिंग देकर पूरी तरह आत्मनिर्भर बना चुका है.
ग्लोबल पहचान और वर्ल्ड रिकॉर्ड
साल 2025 इन दोनों भाइयों के करियर में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ. हेयर कलरिंग के क्षेत्र में एक बेहद कठिन और अनोखा टास्क पूरा करके मोहन और राकेश ने वैश्विक पटल पर सुर्खियां बटोरीं. उनके इस शानदार प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड’ के सर्टिफिकेट से नवाजा गया. इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान के बाद उनके ब्रांड की वैल्यू और साख बाजार में कई गुना ज्यादा बढ़ गई.
युवाओं के लिए प्रेरणा बने दोनों भाई
आज मोहन और राकेश यादव महज सफल एंटरप्रेन्योर (व्यवसायी) नहीं हैं, बल्कि वे देश के उन तमाम युवाओं के लिए एक जीवंत रोल मॉडल बन चुके हैं जो रोजगार के लिए भटक रहे हैं. उनका स्पष्ट मानना है कि अगर सही दिशा, ईमानदारी और अटूट लगन के साथ मेहनत की जाए, तो कोई भी व्यक्ति अपनी किस्मत खुद लिख सकता है. ये दोनों भाई आज भी लगातार युवाओं को हुनरमंद बनाने और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने के मिशन में पूरी मुस्तैदी से जुटे हुए हैं.


