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October 27, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

Roar of the “bow and arrow” in the Assam elections: JMM secures second position on two seats; know the status of the remaining seats

असम के चुनावी रण में झामुमो की दस्तक

झारखंड की सत्ताधारी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने इस बार असम विधानसभा चुनाव 2026 में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए पूरी ताकत झोंकी थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में पार्टी ने राज्य की चुनिंदा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। आज मतगणना के दिन रांची से लेकर गुवाहाटी तक राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि झारखंड के बाहर झामुमो का विस्तार किस हद तक सफल रहा है।

चाय बागान क्षेत्रों में वोटरों का रुझान

झामुमो ने विशेष रूप से असम के उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया था जहां झारखंडी मूल के लोग और चाय बागान श्रमिक बड़ी संख्या में निवास करते हैं। पार्टी ने इन मतदाताओं के बीच अपनी पहचान और अधिकारों का मुद्दा उठाया था। शुरुआती रुझानों के अनुसार, कुछ सीटों पर झामुमो उम्मीदवारों ने सम्मानजनक वोट हासिल किए हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय होता दिख रहा है। हालांकि, मुख्य मुकाबला अभी भी भाजपा और कांग्रेस गठबंधन के बीच ही सिमटा हुआ है।

हेमंत सोरेन की रणनीति और चुनावी प्रचार

चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम के कई इलाकों में जनसभाएं की थीं। उन्होंने आदिवासियों और पिछड़ों के अधिकारों की बात कर वोटरों को रिझाने का प्रयास किया था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि झामुमो असम में अपना खाता खोलने या अच्छा वोट शेयर हासिल करने में सफल रहती है, तो यह पार्टी के राष्ट्रीय विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

रुझानों में JMM की स्थिति

मतगणना के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, झामुमो उन सीटों पर कड़ी टक्कर दे रही है जहां ‘झारखंडी प्रवासियों’ की आबादी अधिक है। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि वे कम से कम 2 से 3 सीटों पर किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, अंतिम परिणाम आने तक यह स्पष्ट नहीं है कि पार्टी अपनी पकड़ मजबूत कर पाएगी या नहीं।

झारखंड की राजनीति पर क्या होगा असर?

असम में झामुमो के प्रदर्शन का सीधा असर झारखंड की आगामी राजनीति पर भी पड़ सकता है। यदि पार्टी वहां अच्छा करती है, तो इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा। रांची स्थित पार्टी मुख्यालय में नेता और कार्यकर्ता पल-पल के रुझानों पर नजर बनाए हुए हैं और सकारात्मक परिणाम की उम्मीद कर रहे हैं।

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